Maharana pratap biography in hindi. Maharana Pratap Biography 2019-02-07

Maharana pratap biography in hindi Rating: 8,8/10 1604 reviews

महाराणा प्रताप का जीवन परिचय और रोचक तथ्य; Maharana Pratap History in Hindi

maharana pratap biography in hindi

Akbar sent a total of six diplomatic missions to Pratap in the hopes of negotiating an alliance with him, but Pratap vehemently refused to accede to the demands of the Mughal. The first episode of the series was narrated by actor. महारानी जसोबाई चौहान — कुंवर कल्याणदास 8. जब महाराणा प्रताप की मृत्यु हुई तो उनका सबसे बड़ा दुश्मन अकबर भी रो पड़ा था। 11. फूलबाई राठौर — चंदा और शिखा 11. It is based on the life of , a sixteenth century of , a region in north-western in the present day state of.

Next

Maharana Pratap History in Hindi, Death, Wife, Son, Date of Birth, Bio

maharana pratap biography in hindi

उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में महाराणा प्रताप की प्रसिद्ध तलवार, कवच एवं युद्ध सामग्री आदि सुरक्षित हैं। 7. When the Rana refused to personally submit to Akbar, war became inevitable. The Mughal emperor was intent on securing a stable route to Gujarat through Mewar; when Pratap Singh was crowned king Rana in 1572, Akbar sent a number of envoys entreating the Rana to become a vassal like many other Rajput leaders in the region. Taking advantage of the situation, Pratap recovered Western Mewar including Kumbhalgarh, Udaipur and Gogunda. In 1567 when Prince Pratap was made the successor, it was 27 years old and the Mughal army surrounded the Chittodara. Intertitle of Maharana Pratap Also known as Mahaputra Genre Created by Abhimanyu Raj Singh Written by Nishikant Roy Pranjal Saxena Surabhi Saral B. As soon as he sat on the throne of Mewar in 1572, he faced unprecedented shock, but he faced every tragedy with patience and courage.


Next

महाराणा प्रताप की गौरवमयी गाथा Maharana Pratap Life Essay History in Hindi

maharana pratap biography in hindi

महाराणा प्रताप को राजपूत वीरता, शिष्टता और दृढ़ता की एक मिशाल माना जाता है। वह मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ने वाले अकेले योद्धा थे। उन्होंने स्वयं के लाभ के लिए भी कभी किसी के आगे हार नहीं मानी थी। वह अपने लोगों से बहुत प्यार करते थे और उनके साथ आजादी की लड़ाई में भी शामिल हुए थे। वह अकबर के साथ हुए हल्दीघाटी के युद्ध में हार गये थे, परन्तु कभी भी आत्मसमर्पण नहीं किया और जीवन के अंत तक संघर्ष करते रहे। वीरता और आजादी के लिए प्यार तो राणा के खून में समाया था क्योंकि वह राणा सांगा के पोते और उदय सिंह के पुत्र थे। एक ऐसा समय आया जब कई राज्यों के राजपूतों ने अकबर के साथ मित्रता कर ली थी, परन्तु मेवाड़ राज्य स्वतन्त्र ही बना रहा, जिससे अकबर बहुत अधिक क्रोधित हो गया था। उन्होंने राजस्थान के मेवाड़ राज्य पर हमला किया और चित्तौड़ के किले पर कब्जा कर लिया और उदय सिंह पहाड़ियों पर भाग गये लेकिन उन्होंने अपने राज्य के बिना भी स्वतंत्र रहने का फैसला किया। उदय सिंह की मृत्यु के बाद महराणा प्रताप ने इस जिम्मेदारी को संभाल कर लोगों के बीच एक सच्चे नेता के रूप में उभर कर सामने आये। प्रताप के पास मुगलों का विरोध करने का ठीक समय नहीं था क्योंकि उनके पास पूंजी धन का आभाव था और पड़ोसी राज्य भी अकबर के साथ मिल गये थे। अकबर ने प्रताप को अपने घर रात्रि भोज पर आमंत्रित करने के लिए मान सिंह को उनके पास अपना दूत बनाकर भेजा, जिसका मुख्य उद्देश्य उनके साथ बातचीत करके शांतिपूर्ण गठबंधन स्थापित करना था। परन्तु प्रताप स्वयं नहीं गये और अपने पुत्र अमर सिंह को अकबर के पास भेज दिया। इस घटना के बाद मुगल और मेवाड़ के बीच सबंधं अधिक बिगड़ गये तथा जल्द ही 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध शुरू हो गया। प्रताप की सेना के मुकाबले मानसिंह के नेतृत्व वाली अकबर की सेना के पास अपार बल था, फिर भी प्रताप ने अपने विरोधियों का बड़ी वीरता के साथ मुकाबला किया। प्रताप की मदद के लिए आस-पास की पहाड़ियों से भील आदिवासी भी आये थे। प्रताप एक सिंह की तरह बड़ी वीरता के साथ युद्ध लड़ रहे थे परन्तु दुर्भाग्य यह था कि दूसरी तरफ मानसिंह था। अंत में, जब मुगल सेना की विजय सुनिश्चित हो गई, तो प्रताप के लोगों ने उन्हें युद्ध के मैदान से हट जाने की सलाह दी। मुगल सेना के प्रकोप से बचने के लिए महान पुरूष-झलासिंह ने प्रताप सिंह की युद्ध से भाग निकलने में काफी मदद की थी। गंभीर रूप से घायल प्रताप को कोई मार पाता, उससे पहले ही वह अपनी सुरक्षा के लिए अपने वफादार घोड़े चेतक पर सवार हो कर भाग गये। प्रताप को अपने भगोड़े जीवन में बहुत कठिन मुसीबतों का सामना करना पड़ा किन्तु वह स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे। भामाशाह जैसे भरोसेमंद पुरुषों की मदद से उन्होंने दोबारा युद्ध लड़ा और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अपना राज्य पुनः स्थापित कर लिया। यद्यपि वह चित्तौड़ राज्य को पूर्णरूप से स्वतंत्र नहीं करा सके थे परन्तु उनकी मृत्यु अपने अनुयायियों के बीच एक वीर योद्धा की तरह हुई। महाराणा प्रताप के बारे में कुछ तथ्य एवं जानकारी उपनाम प्रताप सिंह शासन काल 1568-1597 जन्म 9 मई 1540 जन्मस्थान कुम्भलगढ़ दुर्ग राजस्थान, भारत मृत्यु 19 जनवरी 1597 उम्र 56 पूर्वज उदय सिंह द्वितीय उत्ताधिकारी अमर सिंह प्रथम पत्नी महारानी अजबदे पुनवार पुत्र अमर सिंह राजसी घर सिसोदिया पिता उदय सिंह माता महारानी जयवंताबाई धर्म हिन्दू राज्याभिषेक प्रताप अपने पिता राणा उदय सिंह की पहली पसंद नहीं थे। वह अपने दूसरे पुत्र जगमल को राजा बनाना चाहते थे। हल्दीघाटी का युद्ध 21 जून 1576 को मुगल सेना और प्रताप सेना के बीच हल्दीघाटी गोगुंडा वर्तमान में राजस्थान में युद्ध हुआ जिसमें मुगल सेना की संख्या अधिक होने के कारण प्रताप की सेना को वहाँ से भागना पड़ा। प्रताप का युद्ध से बच निकलना प्रचलित कथाएं बताती है कि प्रताप के एक सेना नायक ने उनके वस्त्रों को धारण कर लिया और उनके स्थान पर युद्ध में लड़ने लगा था और इस प्रकार प्रताप वहाँ से बच निकले। गुरिल्ला का युद्ध अपने निर्वासन के दौरान अरावली की पहाड़ियों में छिपकर प्रताप ने गौरिल्ला युद्ध की तकनीक का प्रयोग करके उन लोगों पर चढ़ाई करने का प्रयास किया। भामाशाह की सहायता दानवीर भामाशाह ने सेनापति के रूप में प्रताप की सहायता की थी ताकि प्रताप मालवा पर उनकी लूट और मुगलों के खिलाफ लड़ाई जारी रख सकें। देवगढ़ का युद्ध देवगढ़ का युद्ध मेवाड़ और प्रताप के बीच हुआ था जिसमें प्रताप की सेना ने जीत हासिल की और कई मेवाड़ राज्यों पर कब्जा कर लिया, लेकिन चित्तौड़ पर कब्जा करने में असफल रहे। बच्चे 17 पुत्र और 5 पुत्रियाँ अंतिम दिन महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 को चावंड में हुई थी।. In 1576, Maharana Pratap fought the fierce Battle of Haldighati against the Mughal forces. महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है, जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है eight. Battle of Haldighati: Battle of Haldighati is a major link in the history of India. महारानी अजब्दे पंवार :- अमरसिंह और भगवानदास 2. उनके जैसा विराट व्यक्तित्व मध्यकालीन भारत में खोजने से भी नहीं मिलता जिन्होंने स्वतंत्रता की खातिर और अपनी मातृभूमि को परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिए अपना जीवन होम कर दिया.

Next

Maharana Pratap Biography (Hindi)

maharana pratap biography in hindi

शहमति बाई हाडा :-पुरा 4. Even though his army was greatly outnumbered by that of the Mughals, the Rajputs fought valiantly. Akbar deputed Man Singh and Asaf Khan I to lead a force against Maharana Pratap in 1576. Since childhood, Maharana Pratap was a brave, brave, self respecting and freedom fighter. हल्दी घाटी में जहां स्वयं महाराणा प्रताप और उनके भाई शक्ति सिंह ने अपने हाथों से अपने घोड़े चेतक का अंतिम संस्कार किया था वहीं हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है। 5. Maharana Pratap History in Hindi Language महाराणा प्रताप का जीवन परिचय Pratap Singh was popularly known as Maharana Pratap.

Next

महाराणा प्रताप का जीवन परिचय

maharana pratap biography in hindi

He was succeeded by his eldest son,. Akbar tried his best to subjugate Uday Singh Ji too. महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो का था और सीने का कवच 72 किलो का। सामान्य इंसान इतना वजन उठा भी नहीं सकता लेकिन महाराणा प्रताप भाला, कवच, अपनी ढाल और तलवार कुल मिलाकर 208 किलो वजन लेकर युद्ध के मैदान में जाते थे। 2. From that onwards, he wandered while suffering in the wilderness of Aravali, but he did not accept the subordination of the Mughal emperor. महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर भी देश की रक्षा की थी। 3. अलमदेबाई चौहान:- जसवंत सिंह 5.

Next

Maharana Pratap Biography (Hindi)

maharana pratap biography in hindi

मेवाड़ राजघराने के वारिस को एकलिंग जी भगवन का दीवान माना जाता है। 10. हल्दी घाटी के प्रांगण में आज भी महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का भब्य मंदिर सुरक्षित है। 8. His father, Rana Udai Singh, is considered to be a weak ruler but Maharana Pratap in contrast is revered as a courageous and brave warrior who refused to submit to the Mughal invasion and tirelessly defended his land and people until the very end. But since Jagmal was weak, inefficient and had a drinking habit, the seniors in the royal court preferred Pratap to be their king. महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम एवं कवच का वजन भी 72 किलो था। 6.

Next

Maharana pratap real story in hindi

maharana pratap biography in hindi

Maharana Pratap was called in the name of Fika in childhood. New Delhi: National Council of Educational Research and Training. The Battle of Haldighati was fought on 18 June 1576 between Maharana Pratap and Akbar's forces led by of. Maharana Pratap was born in Kumbhalgarh fort. महारानी रत्नावती बाई परमार — कुंवर मालसिंह, गज सिंह और किलुंग सिंह 6. The failure of efforts to negotiate a peace treaty angered Akbar who resorted to war to lay his claim on Mewar.

Next

Maharana Pratap

maharana pratap biography in hindi

He was married to Ajabde Punwar of Bijolia. मुग़ल सेना के तोंपो से निकले गोलों ने राजपूत सेना में कहर ढाया था हल्दी घाटी के युद्ध में त्तिसरा दिन निर्णायक रहा, अपने जांबाज सैनिकों के लाशों के अम्बार देखकर महाराणा प्रताप बौखला गए थे सवानवदी सप्तमी का दिन था, आकाश में बदल भयंकर गर्जना कर रहे थे. मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था । वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे । आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं, तो दूसरी तरफ भील 13. खीचर आशाबाई — हत्थी और राम सिंह Amazing Facts about Maharana Pratap History in hindi — महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक तथ्य 1. Maharana Pratap or Pratap Singh was a Hindu Rajput ruler of Mewar, a region in the biography of Maharana Pratap in Hindi maharana Pratap story in Hindi.

Next